जम्मू कश्मीर और हिमाचल के बाद अब चख सकेंगे मेरठ के सेब का स्वाद, तैयार की जा रही खास प्रजाति

आगामी जून माह में मेरठवासी अपनी माटी के उगाए हुए सेब का स्वाद चख सकेंगे। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि में सेब की प्रजाति अन्ना, डोरसेट गोल्डन और एचआर 99 पर शोध चल रहा है। शुरुआती परिणाम शानदार हैं।


अच्छी सर्दी के कारण पेड़ों की ग्रोथ भी बढ़िया है। फरवरी में पेड़ों पर फूल आ जाएगा और जून तक फसल तैयार हो जाएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जम्मू कश्मीर और हिमाचल के सेबों की अपेक्षा यह थोड़े छोटे होंगे, लेकिन स्वाद में किसी से कम नहीं होंगे।


कृषि विवि में अपने यहां की जलवायु के मुताबिक सेब की ऐसी प्रजाति तैयार की जा रही है, जिससे पश्चिमी यूपी के किसान मुनाफा कमा सकें। कृषि विवि के ओल्ड कैंपस में उद्यान विभाग के सहायक निदेशक डॉ. अरविंद कुमार राणा के निर्देशन में सेब की तीन प्रजातियों पर शोध कार्य चल रहा है।


यह प्रजाति इजराइल की है, यहां के वातावरण के लिए इस प्रजाति को संकलित कर अपने यहां पर लगाया गया था। जिसका ट्रायल शुरुआती दौर में सही रहा है। पहले साल फसल कम आती है, लेकिन दूसरे साल में पैदावार बढ़ जाती है। यहां के किसान भी इन प्रजातियों को अपने खेतों में उगा सकते हैं। 


प्रजातियों की खासियत
एचएआर 99 सेब की प्रजाति का फल मध्यम, पीला, लाल छींट लिए हुए, खट्टे मीठे स्वाद जैसा होता है। पहले यह सर्द क्षेत्र में ही होता था, अब गर्म क्षेत्र में भी हो रहा है। इसी को देखते हुए इसके पौधे विवि में लगाए गए हैं। इस पर बीमारी का प्रकोप बहुत कम होता है।


डोरसेट गोल्डन प्रजाति खाने में स्वादिष्ट है। शुरुआती मौसम का असर पेड़ पर दिखता है। इस प्रजाति के लिए ठंड बहुत जरूरी है। इस बार दिसंबर और जनवरी में ठंड बहुत ज्यादा है तो उम्मीद है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार फल ज्यादा आएंगे। अन्ना प्रजाति का फल भी खाने में स्वादिष्ट होता है।


शुरुआती परिणाम शानदार
सेब की तीनों प्रजाति को संकलित कर विवि में ट्रायल के तौर लगाया था, जिसके शुरुआती परिणाम अच्छे रहे। इस बार सर्दी का असर भी ज्यादा रहा है। तीनों प्रजातियों का फल जून तक मार्केट में आ जाता है। यह प्रजाति कश्मीर से आने वाले सेब को भी टक्कर देगी। - डॉ. अरविंद कुमार राणा, सहायक निदेशक उद्यान, कृषि विवि